एक छोटे-से गाँव के किनारे एक बुढ़िया रहती थी। उसका घर साधारण-सा था, पर उसके आँगन में एक आम का पेड़ था, जो पूरे गाँव में मशहूर था। उसी पेड़ पर एक शरारती बंदर रोज आता था।
बुढ़िया उसे प्यार से “लड्डू” कहकर बुलाती थी, क्योंकि उसे मीठे आम बहुत पसंद थे।
एक दिन गाँव का किसान रामू वहाँ से गुज़र रहा था। उसने देखा कि बंदर पेड़ से आम तोड़-तोड़कर नीचे फेंक रहा है और बुढ़िया झाड़ू लेकर उसे भगाने की कोशिश कर रही है।
रामू हँसते हुए बोला,
“माई, इस बंदर से लड़ोगी तो आम तो यह और ज्यादा फेंकेगा! इसे दोस्त बना लो।”
बुढ़िया ने सोचा, “क्यों न कोशिश की जाए?”
अगले दिन उसने एक प्लेट में कुछ चना और गुड़ रख दिया। बंदर पेड़ से उतरकर धीरे-धीरे पास आया और खाने लगा।
धीरे-धीरे वे तीनों—बुढ़िया, बंदर और किसान—अच्छे दोस्त बन गए।